Shahab Uddin

सब हर्फ़ै तमन्ना के तो दामन नहीं होते
अब आम तो होते हैं जामन नहीं होते

शहरों ने उगाई है गमलों में उमंगें
घर होते बड़े हैं यहां आंगन नहीं होते

अमराई न झूलें हैं मुहब्बत के गुमां में
गोरी की निगाहों में भी सावन नहीं होते

भंवरे हैं निगाहों में बस प्यास बसी है
सजनी की निगाहों में भी साजन नहीं होते

कुछ ज़ुल्म के आज़र हैं फिरऔन वफ़ा के
ये हादिसे पैहम भी अकारन नहीं होते

तुम शाह सही होगे इस दारे जहां के
कुछ अश़्कों की क़िस्मत में भी दामन नहीं होते
Shahab Uddin

سب حرفِ تمنا کے تو دامن نہیں ہوتے
اب آم تو ہوتے ہیں کے جامن نہیں ہوتے

شَہروں نے اّگائ ہے گملوں میں امنگیں
گھر ہوتے بڑے ہیں یہاں آنگن نہیں ہوتے

اَمرائ نہ جھولے ہیں محبت کے گماں میں
گوری کی نگاہوں میں بھی ساون نہیں ہوتے

بھنورے ہیں نگاہوں میں بس اک پیاس بسی ہے
سجنی کی نگاہوں میں بھی ساجن نہیں ہوتے

کچھ ظلم کے آزر ہیں فرعون وفا کے
یہ حادثہ پیہم بھی اَکارن نہیں ہوتے

تم شاہ سہی ہوگے اس دارِ جہاں کے
کچھ اشکوں کی قسمت میں بھی دامن نہیں ہوتے
Shahab Uddin

Shahab Uddin | We The Sukhanwar