Sanjay Chaturvedi

तुम्हारे जी में आये वैसे तुम अलमारियाँ रखना
सलीक़े से मगर संदूक में तुम वर्दियाँ रखना

तुम्हें देखेंगे बच्चे कूदकर गोदी में आयेंगे
वो ढूँढेंगे छुपाकर जेब में कुछ टॉफ़ियाँ रखना

वो तुमसे मिलने आयेंगे चमन सूखा हुआ होगा
दुकानों से मँगाकर फूल और कुछ तितलियाँ रखना

नये ताले नयी तकनीक से खुलने लगे लेकिन
बुजुर्गों ने जो तुमको दी हैं वो भी चाभियाँ रखना

झुकाकर तोड़ खाएँगे ये सारे जानवर तुमको
बचाकर डाल पर अपने लिए कुछ पत्तियाँ रखना

किताबों में सिमटकर कुछ पुराने फूल सोये हैं
सँभलकर उन किताबों पर किसी की कॉपियाँ रखना

ये छोटा-सा हुनर है पर तजुर्बे से ही आएगा
किसी से ‘फ़ासले’ रखना किसी से ‘दूरियाँ’ रखना
Sanjay Chaturvedi