जानवर इंसान के पक्के शिकारी हो गये
सीखकर इंसान से बंदर मदारी हो गये
मौत साँसों की बिसातें लेके आयी बिछ गई
ज़िंदगी का दाँव चलके हम जुआरी हो गये
कल सलीक़े का सबक़ वो सीखकर आये मियाँ
कल ही उनके नाम के फ़तवे भी जारी हो गये
मंदिरों को देखना जिसको गवारा भी न था
मंदिरों के देवता उसके पुजारी हो गये
साज़िशन हर-सू अँधेरों की हुक़ूमत हो गई
चाँद,सूरज और तारे सब भिखारी हो गये
Sanjay Chaturvedi