ख़ूबियों ने घर ख़रीदे के ख़ामियों गाँव में
पेड़ जाकर बस गये हैं आरियों के गाँव में
खेलने वालों की फ़ितरत खेल जैसी हो गई
साँप लंबे हो रहे हैं सीढ़ियों के गाँव में
दर्ज़ियों से इस कदर कपड़ों को थी नाराज़गी
अब वो जाकर बस गये हैं कैंचियों के गाँव में
दिल, ज़ेहन, घर में भी दफ़्तर ने ही कब्ज़ा कर लिया
छुट्टियाँ कैसे बिताएँ छुट्टियों के गाँव में
गाँव, गायें और ग़रीबी सबसे नाता तोड़कर
चल पड़ी है अब सियासत कुर्सियों के गाँव में
जिस्म है बीमार या खुद्दार दुनिया हो गयी
लोग भूखे सो रहे हैं रोटियों के गाँव में
Sanjay Chaturvedi