Sanjay Chaturvedi

पड़ोसी मुल्क में नफ़रत तुझे वो प्यार बेचेगा
दिखाएगा वो डर दोनों को फिर हथियार बेचेगा

वो सौदाग़र कि जिसने चीन को दीवार बेची है
नई दिल्ली के लोगों को क़ुतुब मीनार बेचेगा

किसी दिन ये भी आएगा मिलेगी प्यास किश्तों पर
समन्दर बादलों को एक दिन बौछार बेचेगा

सुनाएगा तुझे क़िस्से वो कश्ती के, समन्दर के
तेरे बाज़ू कतरकर फिर तुझे पतवार बेचेगा

बहुत भोला है तू यारा, तू कोई और बिज़नेस कर
लगी हो ‘सेल’ नफ़रत की, तू कैसे प्यार बेचेगा?

तुझे उकसायेगा और एक दिन यूक्रेन कर देगा
तेरे दुश्मन को बंदूक़ें, तुझे तलवार बेचेगा

वो है बाज़ारगाँ वो मुफ़्त में कुछ भी नहीं करता
अगर ‘हाँ’ मुफ़्त में करता है तो इनकार बेचेगा

ज़रा बचकर सफ़र करना महाजन है तेरा रहबर
तेरे पैरों में छाले देखकर रफ़्तार बेचेगा
Sanjay Chaturvedi

Sanjay Chaturvedi | We The Sukhanwar