पड़ोसी मुल्क में नफ़रत तुझे वो प्यार बेचेगा
दिखाएगा वो डर दोनों को फिर हथियार बेचेगा
वो सौदाग़र कि जिसने चीन को दीवार बेची है
नई दिल्ली के लोगों को क़ुतुब मीनार बेचेगा
किसी दिन ये भी आएगा मिलेगी प्यास किश्तों पर
समन्दर बादलों को एक दिन बौछार बेचेगा
सुनाएगा तुझे क़िस्से वो कश्ती के, समन्दर के
तेरे बाज़ू कतरकर फिर तुझे पतवार बेचेगा
बहुत भोला है तू यारा, तू कोई और बिज़नेस कर
लगी हो ‘सेल’ नफ़रत की, तू कैसे प्यार बेचेगा?
तुझे उकसायेगा और एक दिन यूक्रेन कर देगा
तेरे दुश्मन को बंदूक़ें, तुझे तलवार बेचेगा
वो है बाज़ारगाँ वो मुफ़्त में कुछ भी नहीं करता
अगर ‘हाँ’ मुफ़्त में करता है तो इनकार बेचेगा
ज़रा बचकर सफ़र करना महाजन है तेरा रहबर
तेरे पैरों में छाले देखकर रफ़्तार बेचेगा
Sanjay Chaturvedi