लगे लगता रहे बेशक बुरा तुमको
सुनो कहता हूं अब मैं बेवफ़ा तुमको
ख़ुदा की मैं इबादत छोड़ बैठा था
समझता था कभी मैं देवता तुमको
मुहब्बत में उदासी हिज़्र आँसू ग़म
बचा ही क्या नहीं है जो मिला तुमको
हमें खोकर तुम्हें अफ़सोस होगा जब
नहीं हम सा मिलेगा दूसरा तुमको
बताओ क्या लिखूं अब इम्तिहानों में
किताबें छोड़कर मैंने पढ़ा तुमको
अगर तुमसे भी बेहतर मिल गया कोई
मकाम–ए–दिल से तब देंगे हटा तुमको
अगर सर पे न जिम्मेदारियां होतीं
भला क्या चीज़ हो तुम देखता तुमको
Pushpendra Panchal