अँधेरे हैं किधर ये बिजलियाँ पहचान लेती हैं
मिठाई की महक को चींटियाँ पहचान लेती हैं
गिराना है किसे किसको नज़र-अंदाज़ करना है
घरों को दूर से ही आँधियाँ पहचान लेती हैं
ये दीगर बात है माँ-बाप कुछ कहते नहीं मुँह से
पर उनकी बेबसी को बेटियाँ पहचान लेती हैं
कोई भी फूल कितने रौब से ही बाग़ में झूमे
मगर कितना है रस ये तितलियां पहचान लेती हैं
कहाँ सजना, कहाँ सजना, कहाँ ख़ामोश रहना है
कलाई देखकर ही चूड़ियाँ पहचान लेती हैं
उन्हें आँधी, हवा, तूफ़ान से कैसे निपटना है
हर इक मौसम घरों की खिड़कियाँ पहचान लेती हैं
Rambabu Rastogi