हम उनको प्यार करते हैं उन्हें अपना समझते हैं
हमारा दर्द ये है वो हमें झूठा समझते हैं
सियासी गुफ़्तगू मत कीजिए तकलीफ़ होती है
ज़ुबाँ चुप है मगर हम आपका लहज़ा समझते हैं
ये कैसा दौर है बेटा नसीहत भी नहीं सुनता
मगर हम-लोग तो माँ-बाप का चेहरा समझते हैं
हम अपने ख़ून से जिस सरज़मीं को सींचते आये
सियासत-दाँ उसे चौपाल का हुक्का समझते हैं
कहाँ कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने आगे बढ़ो अर्जुन
ये सारे दुष्ट केवल युद्ध की भाषा समझते हैं
Rambabu Rastogi