कड़ी है धूप बदली चाहते हैं
हम इस आँगन में तुलसी चाहते हैं
न माँगें तख़्त, जागीरें, रियासत
मगर ये पेट रोटी चाहते हैं
सिखाते हैं बग़ावत बेटियों को
बहू सीता के जैसी चाहते हैं
निकलना है हमें लंबे सफ़र पे
ज़रा-सी नींद मीठी चाहते हैं
तुम अपना काम-धंधा ख़ुद संभालो
हम इस मुश्किल से छुट्टी चाहते हैं
Rambabu Rastogi