Rambabu Rastogi

मेरे आँगन में ये दीवारें कहाँ से आ गयीं
भीतरी कमरों में बौछारें कहाँ से आ गयीं

'ग' से गाँधी हम तो बच्चों को पढ़ाते रह गए
इनके हाथों में ये तलवारें कहाँ से आ गयीं

क़ैदियों के पाँव में हरक़त तो कोई भी न थी
बेड़ियों में फिर ये झंकारें कहाँ से आ गयीं

मैं भजन गाऊँ करूँ सजदा ये है मर्ज़ी मेरी
इसमें घंटी और मीनारें कहाँ से आ गयीं

दोस्तों में हैसियत का ज़िक्र क्यों उठने लगा
दोस्ती में कोठियाँ-कारें कहाँ से आ गयीं

दिल से दिल के बीच रिश्तों की ज़बान है एक-सी
इसमें झंडे और दस्तारें कहाँ से आ गयीं
Rambabu Rastogi