Kanupriya

हिज्र हो या विसाल रहने दो
दूर मुझसे वबाल रहने दो

दरमियान इक सवाल रहने दो
राब्ता यूँ बहाल रहने दो

शेर कह लो किसी परिंदे पर
जाँ! मुहब्बत के जाल रहने दो

तुमको दुनिया सँवारनी है अगर
तो मेरे उलझे बाल रहने दो

इल्म की धूप ओढ़ आए हैं
हुस्न के ज़र्द शाल रहने दो

वक़्त-ए-रुख़्सत की रस्म का हासिल
लब पर आख़िर विसाल रहने दो

लग गई है हमें नज़र इसकी
इश्क़ को ये मलाल रहने दो
Kanupriya

Kanupriya | We The Sukhanwar