Kanupriya

गुलों के दामन पे रंग-रोग़न की बाग़बानी सुख़नवरी है
ये मौसम-ए-गुल ये रंग निकहत ये गुल-नियाज़ी सुख़नवरी है

ख़मोश रहकर ग़मों को सहते तो जी न पाते न दम निकलता
मगर ख़ुदा ने कहन अता की सो मेहरबानी सुख़नवरी है

या अपनी आँखों को नोंच लें हम या अपनी चीख़ों को दफ़्न कर दें
सुकूँ से दीगर ये बे-सुकूनी ये बदहवासी सुख़नवरी है

दुआ, दवा, प्यार, ख़ुश-मिज़ाजी, अदा, बयानी, ये नर्म लहजे
तेरी नज़र में सुखन नहीं तो ज़बाँ-दराज़ी सुख़नवरी है?

ये रास्ते भी हमारे मिसरों के जैसे तुम पर ही ख़त्म होंगे
जहान मतलब तुम्हारी जानिब ख़ुदा की कोई सुख़नवरी है

जो शेर अच्छा है वो ज़रूरी नहीं कि सच्चा भी हो सुख़न-दाँ
किसी-किसी के लिए यहाँ लफ़्ज़-ए-रोज़गारी सुख़नवरी है

तुम्हारे लहजे से अलहदा है तुम्हारे मेयार से जुदा है
मुआफ़ करना बुरी नहीं है अलग हमारी सुख़नवरी है
Kanupriya

Kanupriya | We The Sukhanwar