Kanupriya

आहट-आहट पर रूपोशी होती है
मौसम की अपनी मदहोशी होती है

ख़्वाब देखने वाले जागा करते हैं
जागने वालों में बेहोशी होती है

बातें अच्छी और बुरी हो सकती हैं
इसीलिए मुझमें ख़ामोशी होती है

नींद ख़ुमार-ए-मय से मिलती-जुलती है
यानी थकन दूजी मय-नोशी होती है

हम दोनों तन्हा हैं सो तन्हाई से
तन्हाई की हम-आग़ोशी होती है

हमने बस दश्त-ए-जज़्बात में ये जाना
सुख़नवरी ख़ाना-बरदोशी होती है
Kanupriya

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