Kanupriya

कोई चाहत से कोई दिखने-दिखाने से रहा
जो भी दुनिया में रहा अपने बहाने से रहा

मिल भी जाएगा तो ये जान बचाने से रहा
कोई सागर हमारी प्यास बुझाने से रहा

चश्म-बंदी ने मेरे ख़्वाबों को बाँधा गोया
इस इबादत-क़दे में अब कोई आने से रहा

या सुख़न-गोई है या तेरी ख़मोशी है नजात
तेरा रोना तो तेरे दर्द घटाने से रहा

मेरी क़िस्मत ने लिया होगा सहारा तेरा
और कोई तो मेरे दिल को दुखाने से रहा

तुमसे निस्बत है मुझे सो ही निभाता हैं तुम्हें
वर्ना दुनिया से मेरा दिल तो निभाने से रहा

सिर्फ़ तुमको ही गिला मेरी तवज्जोह का नहीं
ये रवैया तो मेरा सारे ज़माने से रहा
Kanupriya