बे-इख़्तियार लोग किधर जायेंगे जनाब
बेचैनियों के साथ ही मर जायेंगे जनाब
ख़ुशबू हैं अंदरून ही रखियेगा हमको आप
आँखों में आ गए तो अखर जायेंगे जनाब
मालूम भी नहीं कि कहाँ जाना है मगर
तय है कि इस जहाँ से बशर जायेंगे जनाब
ख़्वाबों के लोग ख्व़ाब में मिलते हैं बारहा
सो हम भी अपने ख्व़ाब-नगर जायेंगे जनाब
आँसू नहीं हैं साँसों के मानिंद होते ग़म
ज़ब्त-ए-फ़ुगां में आप बिखर जायेंगे जनाब
लाकर सहूलतों के मुक़ाबिल में क़ायदे
वादा-परस्त लोग मुकर जायेंगे जनाब
मंज़िल के बाद भी है कोई आख़िरी सफ़र
आख़िर में लोग सू-ए-सफ़र जायेंगे जनाब
Kanupriya