Kanupriya

इसी आराइशी दुनिया में कुछ बेढब भी होती हैं
नहीं रहता कोई हमदर्द जब वो तब भी होती हैं
ज़रूरी ही नहीं है राब्तों में तौर शामिल हो
बहुत बातें हमारे बीच बेमतलब भी होती हैं
Kanupriya