Kanupriya

ख़ामोशी के साथ पाँव में रहता है
अपना साया भी अपना इक गहना है

पलकों और रोशनी से भी रिश्ता है
ख़्वाब नहीं बस चश्म से ही वाबस्ता है

इस दुनिया के आगे भी इक दुनिया है
हथेलियों पर चस्पा जिसका नक़्शा है

आँख नहीं बीनाई इस्तेमाल करें
बीनाई से हर मंज़िल का रस्ता है

इश्क़, ख़ुदा, ईमान, हवा सच है लेकिन
सच अपना महसूस करो तो दिखता है

जिनको मुहब्बत हो वो इसके साथ चलें
दरिया का रुकना नामुमकिन होता है

आँखों से दिल तक जाने में राह-ज़नों
अक़्ल-ओ-दानाई का सागर पड़ता है
Kanupriya