Kanupriya

शे'र होकर ही ख़ास करता है
ग़म वगरना उदास करता है

ज़िन्दगी बे-क़यास करता है
इश्क़ यूँ ग़मशनास करता है

रेगज़ारों में समंदर की तरह
ख़्वाब भी झूठी आस करता है

उजलतों ने जो सब्र बख़्शा था
दिल को वो बे-असास करता है

ख़ामुशी ग़म छुपाके रखती है
पर सुख़न बे-लिबास करता है

अँगुलियाँ मेरी चूमने के लिए
चाँद ख़ुद इर्तिमास करता है

पैरहन जैसा आसमाँ पर है
अब्र ख़ुद को लिबास करता है
Kanupriya