Aatish Muradabadi

इक नई तहज़ीब का आग़ाज़ है उर्दू ग़ज़ल
हुस्न की तारीफ़ का अंदाज़ है उर्दू ग़ज़ल

जाने किस किसने लहू देकर सँवारा है इसे
दौर-ए-हाज़िर में मगर ना-साज़ है उर्दू ग़ज़ल

शाइरों के ख़्वाब की तस्वीर बनती है कभी
दास्तान-ए-इश्क़ में परवाज़ है उर्दू ग़ज़ल

दौर-ए-हाज़िर की हक़ीक़त भी बयाँ ये कर रही
'मीर'-ओ-'ग़ालिब' से मिला एजाज़ है उर्दू ग़ज़ल

हुस्न की गहराइयों में डूबकर देखो ज़रा
इश्क़ में लिपटी हुई गुलनाज़ है उर्दू ग़ज़ल

नज़्म हो या हो रुबाई कहिये या क़ित'आ जनाब
शाइरी की सिंफ़ का शहबाज़ है उर्दू ग़ज़ल

'मीर' 'ग़ालिब' 'दाग़' 'मोमिन' 'जौन' 'राहत' ने कहा
हर क़लम बोला यही मुम्ताज़ है उर्दू ग़ज़ल

दिल धड़क जाते हैं बस इक हुस्न की अंगड़ाई पर
आज 'आतिश' की वही हमराज़ है उर्दू ग़ज़ल
Aatish Muradabadi