कहाँ गए?

तपती छत पर दौड़ लगाते
पाँवतलों से धूप दबाते
डोर-पतंगों से बतियाते
चंचल बच्चे कहाँ गए?

हर संभव सीमाएँ लाँघे
बेफ़िक्री का बस्ता टाँगे
अल्हड़पन की बरखा बाँधे
बादल-बच्चे कहाँ गए?

उजड़ी बंजर इस दुनिया के
जंगल-बच्चे कहाँ गए?
Dr. Shivam Dwivedi