साथ लेकर यहाँ से कोई भी क्या जाएगा
एक दिन आदमी दुनिया से चला जायेगा
हुस्न इक आग है इस आग से मत खेल कभी
तेरे एहसास को ज़िंदा ही जला जाएगा
लोग विश्वास के काबिल नहीं है दुनिया में
लेके विश्वास में विश्वास छला जाएगा
नफ़रतें, नफ़रतों को ख़त्म नहीं कर सकती
ज़ख़्म से कोई भी क्या ज़ख़्म भरा जाएगा
मेरे भाई न जुदा होना कभी तुम मुझसे
ग़म जुदाई का न इक रोज़ सहा जाएगा
एक विश्वास ही विश्वास का क़ातिल निकला
कैसे विश्वास को विश्वास कहा जायेगा
Anil Manav