Rakhi Alp

हाथों की लकीरों में ग़म–ए–फ़िराक़ कब तलक
इश्क़ के सवाल पे हँसी–मज़ाक़ कब तलक

अब तो कह भी दो, कहोगी उस मिलन की रात को
इत्तिफ़ाक़! इत्तिफ़ाक़! इत्तिफ़ाक़! कब तलक
Rakhi Alp

Rakhi Alp | We The Sukhanwar