हाथों की लकीरों में ग़म–ए–फ़िराक़ कब तलकइश्क़ के सवाल पे हँसी–मज़ाक़ कब तलकअब तो कह भी दो, कहोगी उस मिलन की रात कोइत्तिफ़ाक़! इत्तिफ़ाक़! इत्तिफ़ाक़! कब तलकRakhi Alp