Amritesh Kumar Mishra

ये माना मेरी जाँ अँधेरा बहुत है
मगर इसके आगे सवेरा बहुत है

अजब मोड़ पर आ खड़ा है मेरा दिल
न तेरा बहुत है न मेरा बहुत है

मेरी सम्त मैं तो अकेला खड़ा हूँ
तेरी सम्त दुनिया का घेरा बहुत है

नहीं चाहता हूँ कि दुनिया मिले अब
तेरी यादों का ही बसेरा बहुत है
Amritesh Kumar Mishra