Surendra Bhatia 'Salil'

उनके घर जो आना जाना होता है
वो ही दिल का आब-ओ-दाना होता है

ख़्वाबों को दफ़ना कर बेटी जाती है
हर घर के नीचे तहख़ाना होता है

या तो हम को पूरा कर या रहने दे
तेरा हर दिन नया बहाना होता है

उनको भी फिर हमसे इश्क़ की हसरत है
हमको भी फिर ख़्वाब दिखाना होता है

हुस्न को इतनी बेबाकी भी ठीक नहीं
रग़बत में थोड़ा शर्माना होता है

शाम ढले इक तन्हाई और दो आँसू
यादों का कुछ तो जुर्माना होता है

शादी गुज़री फिर भी तुम पर ग़ज़लें हों
रब को भी चेहरा दिखलाना होता है
Surendra Bhatia 'Salil'