Sohil Barelvi

अब नहीं भाएगा मेरा कभी आना उसको
अपनी बातों में ले आया है ज़माना उसको

याद आ जाएगा उसको भी बहुत कुछ यारो
मेरे अशआर किसी रोज़ सुनाना उसको

उसको मालूम हुआ तो वो परेशाँ होगा
मैं परेशाँ हूँ ख़ुदारा न बताना उस को

मैं ही था कल वो जिसे देर तलक सुनता था
अब मिरी बात लगा करती है ताना उसको

एक दिन उठ गया पहलू से अचानक मेरे
एक दिन मिल ही गया दूसरा शाना उसको

सुब्ह से आँखें मिरी देख रहीं उस की राह
एक पल को ही सही चाहिए आना उसको

साल-हा-साल गुज़र जाने पे अब तक सोहिल
उसने मुझको नहीं मैंने नहीं जाना उसको
Sohil Barelvi