हर फ़िक्र छोड़ दे न किसी का ख़याल कर
जी भरके मेरे यार मेरा इस्तेमाल कर
महसूस कुछ न होने दे है तेरी ख़ासियत
तू दिल भी तोड़ता है तो बेहद सँभालकर
जिनका न हो इलाज किसी चारागर के पास
ऐसे भी कुछ मरज़ रखें हैं मैंने पालकर
पी लूँ मैं अपने चाहने वाले के हाथ से
गर ज़ह्र भी पिलाए वो शर्बत में डालकर
होगा न एतिबार वफ़ा पर मेरी तुझे
मैं सामने भी रख दूँ अगर दिल निकालकर
इतने सितम हुए कि मुझे बोलना पड़ा
ताला रखूँ ज़बान पे कब तक मैं डालकर
पूरे हुए न काम अभी ऐ मेरे ख़ुदा
हिस्से की मेरे थोड़ी-सी साँसें बहाल कर
Sangeet pandey