जीवन में अनुनाद नहीं है,विस्मय है
दृश्य बड़े,संवाद नहीं है ,विस्मय है
क्यों तटस्थ हैं ,सब आशाएं
दीपक को गोधूलि बुझाए
क्यों अनुकंपा के सम्यक स्वर
बहरों को आवाज़ लगाएं
वस्त्रों वाले अन्तस नग्न लिए बैठे
पर उनको अवसाद नही है,विस्मय है
चिकनी चुपड़ी बातें देखीं
मैंने केवल रातें देखीं
जलद घिरे औ बरस गए पर
कब मैंने बरसातें देखीं?
वायसराय रहे तुम दिल के ,चले गए
दिल फिर भी आज़ाद नहीं है ,विस्मय है
देवकी नन्दन मिश्र 'देव्यन'