हिज्र हो या विसाल रहने दो
दूर मुझसे वबाल रहने दो
दरमियाँ इक सवाल रहने दो
राब्ता यूँ बहाल रहने दो
शे'र कह लो किसी परिंदे पर
ये मोहब्बत के जाल रहने दो
तुमको दुनिया सँवारनी है अगर
तो मिरे उलझे बाल रहने दो
इल्म की धूप ओढ़ आए हैं
हुस्न की ज़र्द शाल रहने दो
वक़्त-ए-रुख़्सत की रस्म का हासिल
लब पर आख़िर विसाल रहने दो
लग गई है हमें नज़र उसकी
इश्क़ को ये मलाल रहने दो
Kanupriya