Kanupriya

ख़्वाब आँखों में जज़्ब होने में
हमको मुद्दत लगी है सोने में

उसने आना नहीं चुना वर्ना
वक़्त लगता है वक़्त होने में

क्या मिला था किसी को पाने से
क्या गया है किसी को खोने में

दिल में दुनिया बसाई है हमने
दिल की दुनिया रखी है कोने में

भूल बैठी हैं देखने की अदा
आँखें सपने तेरे संजोने में

फ़र्क़ सच और झूट का है फ़क़त
शेर लिखने में शेर होने में

कितने दरिया बहा चुकीं आँखें
एक चेहरे के रंग धोने में
Kanupriya