Nazeer Nazar

ऐसे किसी को घर से अलग कर दिया गया
पगड़ी को जैसे सर से अलग कर दिया गया

जिसकी सबब मिले थे हमें गिफ़्ट में
हमको उसी हुनर से अलग कर दिया गया

हैरत है बाँटती थी हमेशा जो सबको फल
उस शाख़ को शजर से अलग कर दिया गया।

नींदों का एहतिराम नहीं कर सका जो मैं
ख्वाबों की रहगुज़र से अलग कर दिया गया

था 'नून' 'ज़र' के साथ तो इक रौशनी-सी थी
फिर 'नून' क्यूँ 'नज़र' से अलग कर दिया गया
Nazeer Nazar

Nazeer Nazar | We The Sukhanwar