मुश्किलों के सामने हो जा निडर
सीख लेगा तू भी जीने का हुनर
चांँद भी लगता है रोटी की तरह
पेट ने मुझ को नचाया इस क़दर
कामयाबी चूमकर मानूंँगा मैं
हौसला है ज़िंदगी का हमसफ़र
उससे बढ़कर फिर कोई वहशी कहांँ
आदमी में जाग उठे जब जानवर
मेरी आँखों में वो डूबे दो घड़ी
जिसको होना हो जहाँ से बे-ख़बर
प्रेम-धुन से दिल का मंदिर गूंँज उठा
बाँसुरी पर जब रखे मैंने अधर
प्यार, अपनापन, वफ़ा भी जोड़िए
काम आएगी न दौलत उम्र-भर
राजेश 'भारती'