हिंदुस्तानी कल्चर मैंप्रेम का अक्षर-अक्षर मैंदेखो भरकर लाया हूंँ गागर में इक सागर मैं गिरने का अफ़सोस नहींसँभला ठोकर खाकर मैं जो चाहूंँ वो करता हूँ अपने मन का अफ़सर मैंजिस दिन जानूंँगा ख़ुद कोहो जाऊंँगा बेहतर मैंराजेश 'भारती'