राजेश 'भारती'

हिंदुस्तानी कल्चर मैं
प्रेम का अक्षर-अक्षर मैं

देखो भरकर लाया हूंँ
गागर में इक सागर मैं

गिरने का अफ़सोस नहीं
सँभला ठोकर खाकर मैं

जो चाहूंँ वो करता हूँ
अपने मन का अफ़सर मैं

जिस दिन जानूंँगा ख़ुद को
हो जाऊंँगा बेहतर मैं
राजेश 'भारती'

राजेश 'भारती' | We The Sukhanwar