ख़ूबसूरत हैं बहुत ही वादियाँ विश्वास की
टूटकर जुड़ती नहीं पर टहनियाँ विश्वास की
ताना-बाना बुनती है यूँ तो हर इक संबंध का
होती हैं नाज़ुक बहुत पर उँगलियाँ विश्वास की
रिश्ते-नाते, दोस्ती हैं इक खिलौने की तरह
उम्रभर भरते रहो तुम चाबियाँ विश्वास की
दाग़ दामन में कभी लगने न पाये लो शपथ
जो पहन रक्खी है तुमने वर्दियाँ विश्वास की
दिल से दिल तक तुम उतर सकते हो चाहे जब कभी
दिल पे चुपके से लगाकर सीढ़ियाँ विश्वास की
तोड़ देती हैं मुझे जब ज़ीस्त की दुश्वारियाँ
तब बुलाकर देती है माँ थपकियाँ विश्वास की
बस तभी तक रोशनी देगा मुहब्बत का दिया
जब तलक जलती रहेंगी बत्तियाँ विश्वास की
जानते हैं सब मछेरे बच के जाएगी कहाँ
चाहतों के जाल में हैं मछलियाँ विश्वास की
सोचकर विश्वास होता ही नहीं है आज तक
इस क़दर उसने उड़ायीं धज्जियाँ विश्वास की
Anil Manav