हिज्र का सौग मनाना कभी दरिया रोना
याद करके तुझे हँसना, कभी रोना रोना
क्या बताऊँ उसे किस बात पे हँसते देखा
क्या बताऊँ मुझे किस बात पे आया रोना
कैसे भूलूँगा वो बेबाक अदाएँ उसकी
उसकी बातें, तो वो हँसना, वो लिपटना, रोना
बात औरों की नहीं, तू तो मेरा अपना था
काश तुझको नज़र आता मेरे दिल का रोना
कोई तो बात उसे इतना रुलाती होगी
अच्छा लगता है किसे टूट के तन्हा रोना
तुम तो ख़ुश थे न मुझे छोड़ के जाते जाते
वक़्त-ए-रुख़्सत तुम्हें किस बात पे आया रोना
मुद्दतों बाद ये एहसास हुआ है ‘राही’
मुद्दतों बाद फिर आया मुझे इतना रोना
Aadil Rahi