गिर्द जम जाए तो शीशा नहीं देखा जाता
यानी तस्वीर को धुंधला नहीं देखा जाता
तिश्नगी आ तुझे दरिया के हवाले कर दूँ
तुझ को इस हाल में प्यासा नहीं देखा जाता
तुम मेरा नाम-ओ-नसब पूछ रहे हो सब से
इश्क़ हो जाए तो शजरा नहीं देखा जाता
लौट आने की तसल्ली तेरी झूठी ही सही
अब तो मुड़-मुड़ के यूँ रस्ता नहीं देखा जाता
शेर अच्छे जो बुरे लगते हैं दुनिया को मेरे
हो ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं देखा जाता
लोग मिलते हैं बिछड़ते हैं मगर क्यों मुझ से
यूँ तेरा छोड़ के जाना नहीं देखा जाता
अज़्ज़-ओ-तौक़ीर का ये हाल, हसद में हम से
क़द किसी का भी हो ऊँचा नहीं देखा जाता
Aadil Rahi
گرد جم جائے تو شیشہ نہیں دیکھا جاتا
یعنی تصویر کو دھندلا نہیں دیکھا جاتا
تشنگی آ تجھے دریا کے حوالے کر دوں
تجھ کو اس حال میں پیاسا نہیں دیکھا جاتا
تم مرا نام و نسب پوچھ رہے ہو سب سے
عشق ہو جائے تو شجرہ نہیں دیکھا جاتا
لوٹ آنے کی تسلی تری جھوٹی ہی سہی
اب تو مڑ مڑ کے یوں رستہ نہیں دیکھا جاتا
عز و توقیر کا یہ حال حسد میں ہم سے
قد کسی کا بھی ہو اونچا نہیں دیکھا جاتا
Aadil Rahi