Ashraf Jahangeer

आपके ज़ख़्म शगुफ़्ता नहीं होने देते
और सितम ये कि हमेशा नहीं होने देते

यूँ तो हर दिन मैं अज़ीज़ उनको ही होता हूँ मगर
ख़ास दिन पे मुझे अपना नहीं होने देते

उनपे मरने के लिए ही तो मैं जीता हूँ मगर
मुझको नासेह कभी उनका नहीं होने देते

हँसने वाले बड़े चालाक हुआ करते हैं
ऐसे रोते हैं तमाशा नहीं होने देते

अब फ़क़त चेहरे पे नज़रें नहीं रुकती मेरी
कई धोके हैं जो धोका नहीं होने देते

तू कहीं और जो ख़ुश है तो ये एहसान समझ
हम तेरे दोस्त थे वरना नहीं होने देते

इश्क़ हो जाए तो फिर इश्क़ निभाना होगा
वो समझते हैं लिहाज़ा नहीं होने देते

हमीं लोगों ने बचा रक्खा है रातों का वजूद
शहर-वाले तो अँधेरा नहीं होने देते
Ashraf Jahangeer