जाने कितने दीप वफ़ा के जलते हैं
दिल वाले जब दिल वालों से मिलते हैं
उन आँखों का कमरा रोशन रहता है
जिन आँखों में ख़्वाब तुम्हारे पलते हैं
बाम पे आकर जब ज़ुल्फें लहराती हों
देखके तुमको चाँद-सितारे जलते हैं
साँसों की गर्मी पागल कर देती है
जब दो प्यासे तन आपस में मिलते हैं
आज मेरे होंठों को उसने चूमा है
आज किसी शायर से मिलने चलते हैं
इनकी ख़ुशबू से ख़ुद को गुलज़ार करो
रोज़ कहाँ ये फूल वफ़ा के खिलते हैं
Piyush Sharma