Sangeet pandey

रक्खा है कहाँ लोगों ने ईमान पकड़कर
सब चल रहे हैं फ़ायदा-नुक़्सान पकड़कर

खाते हैं क़सम लोग बिना ख़ौफ़ के झूठी
गीता तो कभी हाथों में क़ुरआन पकड़कर

इस दौर में नीयत रखे जो साफ़ हमेशा
लाऊँ कहाँ से ऐसा मैं इंसान पकड़कर

आ जाती ठिकाने पे मियाँ अक़्ल हमारी
समझाता अगर कोई हमें कान पकड़कर

अब तक किया क्या हमने है "संगीत" किसी दिन
पूछेगा ख़ुदा हमसे गिरेबान पकड़कर
Sangeet pandey

Sangeet pandey | We The Sukhanwar