किसी के लब पे मुहब्बत का तराना न मिला
आपके शह्र में कोई भी दिवाना न मिला
कितना तरसा हूँ मैं दुनिया में तवज्जो के लिये
घर का भूखा था तो रस्ते में भी खाना न मिला
मेरे धोके में कहीं तुझको न लग जाये तीर
दूर रह दोस्त मेरे शाने से शाना न मिला
हम भी ताउम्र रहे दौलत-ए-ग़म से आबाद
उसके दिल में भी कोई और खज़ाना न मिला
चाँदनी रात थी बारिश के भी इमकान न थे
हिज्र की रात में मौसम भी सुहाना न मिला
Amulya Mishra