इस दिल के सायबान में अब कोई भी नहींउजड़े हुये मक़ान में अब कोई भी नहीउस शहसवार को तो हक़ीक़त निगल गयीपरियों की दास्तान में अब कोई भी नहींअब सबको आ गया है सब्र अपने हाल परलम्हों की खींचतान में अब कोई भी नहींAmulya Mishra