Amulya Mishra

इस दिल के सायबान में अब कोई भी नहीं
उजड़े हुये मक़ान में अब कोई भी नही

उस शहसवार को तो हक़ीक़त निगल गयी
परियों की दास्तान में अब कोई भी नहीं

अब सबको आ गया है सब्र अपने हाल पर
लम्हों की खींचतान में अब कोई भी नहीं
Amulya Mishra

Amulya Mishra | We The Sukhanwar