Amulya Mishra

जगह बनाती है पहले चटान घिस-घिसके
नदी वजूद में आती हैं अपने रिस-रिसके

न जाने किसकी दुआओं से फिर चराग़ जला
कहाँ-कहाँ न गये पाँव पकड़े किस-किसके

ख़ुशी की देवी कभी झाँक ले दरीचे से
मैं थक गया हूँ तेरे दर पे जूते घिस-घिसके

ख़ुदा के बंदों दुआएं तो ठीक हैं लेकिन
रहेंगे याद वही फूल आये जिस-जिसके

मैं डरते-डरते दिखाता हूँ पहले अपने ज़ख़्म
फिर उसको नाम बताता हूँ ये हैं इस-इसके
Amulya Mishra