जगह बनाती है पहले चटान घिस-घिसके
नदी वजूद में आती हैं अपने रिस-रिसके
न जाने किसकी दुआओं से फिर चराग़ जला
कहाँ-कहाँ न गये पाँव पकड़े किस-किसके
ख़ुशी की देवी कभी झाँक ले दरीचे से
मैं थक गया हूँ तेरे दर पे जूते घिस-घिसके
ख़ुदा के बंदों दुआएं तो ठीक हैं लेकिन
रहेंगे याद वही फूल आये जिस-जिसके
मैं डरते-डरते दिखाता हूँ पहले अपने ज़ख़्म
फिर उसको नाम बताता हूँ ये हैं इस-इसके
Amulya Mishra