मैं किसी से भी कहीं पर भी झगड़ सकता हूँ
इतना अच्छा हूँ कि अब सिर्फ़ बिगड़ सकता हूँ
तुमसे पहले भी कई छोड़ चुके है मुझको
तुमसे पहले भी मैं बिछड़ा हूँ बिछड़ सकता हूँ
मैं वो बस्ती हूँ जो बसती है उजड़ने के लिए
मुझको आदत है उजड़ने की उजड़ सकता हूँ
कौन करता है यहाँ जंग नतीज़े के लिये
जीतकर हारने वाले से झगड़ सकता हूँ
दौड़ में जितने भी लड़के हैं वो जूते में हैं
मैं बिना पाँव हूँ मुमकिन है पिछड़ सकता हूँ
मैं तुम्हें चाँद-सितारे तो नहीं दे सकता
तंग लम्हों में मगर हाथ पकड़ सकता हूँ
Amulya Mishra