Amulya Mishra

तुम्हें तो आयेगी बस मीर की ख़ुमारी पसंद
कहाँ अमूल्य की ग़ज़लें कहाँ तुम्हारी पसंद

फिर एक शख़्श मुझे बेहिसाब याद आया
फिर एक बार किसी जिस्म पर उतारी पसंद

शराब, इश्क़, वफ़ा, हिज्र, मौत, शेर-ओ-सुख़न
ये सारे शौक़ मुझे आये बारी बारी पसंद

दिखाऊँगा मैं तुम्हें वापसी में अपना सफ़र
कहाँ पे भूक मिटायी कहाँ पे मारी पसंद

तुम उसके वास्ते हमको पसंद थे शाहरुख़
उसे पसंद थे तुम और वो हमारी पंसद
Amulya Mishra