Sangeet pandey

ये दिल धड़क रहा है मेरा ऐतिबार कर
मुर्दों में मत अभी से मुझे तू शुमार कर

जल्दी से कब किसी को भी हासिल हुआ हूँ मैं
ऐ मौत थोड़ा और मेरा इंतिज़ार कर

खोने को कुछ बचा ही कहाँ बाद इश्क़ के
सब कुछ तो इस जुए में मैं बैठा हूँ हारकर

तन्हाइयाँ सताती हैं रह-रहके रात-दिन
बिच्छू के जैसे डंक मुझे मार-मारकर

मज़बूरी ऐसी क्या थी मेरे यार जो तूने
शर्म-ओ-हया के रख दिए ज़ेवर उतारकर

कुछ ख़ास फ़र्क पड़ना नहीं है मुझे यकीं
अज़्मत तू चाहे जितनी मेरी दाग़दार कर

"संगीत" जिसको रास्ता मैंने दिखाया था
आगे निकल गया वो मुझे दर-किनार कर
Sangeet pandey

Sangeet pandey | We The Sukhanwar