ग़ज़लों के सब रंग दिखाने आया हूँ
मुस्तक़बिल के गीत सुनाने आया हूँ
सात समंदर लेकर अपने प्याले में
सहराओं की प्यास बुझाने आया हूँ
तेरे दिल की सूखी बंज़र धरती पर
उम्मीदों की फ़स्ल उगाने आया हूँ
गुलशन में कलियाँ बेचेंगे माली सो
वीराने में फूल खिलाने आया हूँ
Pushpendra Pushp