इस ज़िंदगी को मौत से भी बद-तरीन देख
काबे की ओर जाने लगे मुंकिरीन देख
चालाकियाँ ये ख़्वाहिशें आदम से कहती हैं
बेहतर को पा लिया है तो अब बेहतरीन देख
स्कूल के दिनों में जिन्हें देखते न थे
वो लड़कियाँ भी हो गईं कितनी हसीन देख
इक बार उसने आँख दिखाई थी मुझको दोस्त
नीचे है उसकी आज तलक आस्तीन देख
वो दोस्ती निभाएगा इस दुश्मनी के बाद
अपने रक़ीब पर कभी करके यक़ीन देख
मासूमियत भी मिट गईं नादानियाँ भी ख़त्म
इक हादसे ने कर दिया कितना ज़हीन देख
Lalit Pandey