हमारे नाम के माथे पे बल पड़े होंगे
पिताजी नौ बजे ऑफिस निकल पड़े होंगे
हमारे नाम से पापा के तंज़ कसने पर
हमारी माँ के तो आँसू उबल पड़े होंगे
कभी अना की भी जेबें टटोल कर देखो
उन्हीं में मसअलों के सारे हल पड़े होंगे
हमारे पाँव के छालों को देखकर केवल
जबीं पे राह की दो-चार शल पड़े होंगे
वो आदतन ही बग़ीचे में आ गई होगी
तमाम फूल बग़ीचे के जल पड़े होंगे
हमारे साथ में चलने से डर गई थी वो
अब उसकी राह में शायद कँवल पड़े होंगे
हमारे जैसा कोई दूसरा नहीं होगा
तुम्हारे जैसों के सौ-सौ बदल पड़े होंगे
Sandeep Shrivastava