Sandeep Shrivastava

हमारे नाम के माथे पे बल पड़े होंगे
पिताजी नौ बजे ऑफिस निकल पड़े होंगे

हमारे नाम से पापा के तंज़ कसने पर
हमारी माँ के तो आँसू उबल पड़े होंगे

कभी अना की भी जेबें टटोल कर देखो
उन्हीं में मसअलों के सारे हल पड़े होंगे

हमारे पाँव के छालों को देखकर केवल
जबीं पे राह की दो-चार शल पड़े होंगे

वो आदतन ही बग़ीचे में आ गई होगी
तमाम फूल बग़ीचे के जल पड़े होंगे

हमारे साथ में चलने से डर गई थी वो
अब उसकी राह में शायद कँवल पड़े होंगे

हमारे जैसा कोई दूसरा नहीं होगा
तुम्हारे जैसों के सौ-सौ बदल पड़े होंगे
Sandeep Shrivastava

Sandeep Shrivastava | We The Sukhanwar