Firoze

थक गए जब यार समझाकर मुझे
चल दिए कुछ देर बहला कर मुझे

कान खाए जा रही है ख़ामुशी
ज़िंदगी यूँ चीख, बहरा कर मुझे

बाँट मुझको ज़िंदगी और मौत में
काट ऐसे, ऐन आधा कर मुझे

हो गयी माँ बद-नज़र की ख़ुद शिकार
पर गई तावीज़ पहनाकर मुझे

कम से कम ख़ुद से तो धोका खा सकूँ
ज़िंदगी इतना तो सादा कर मुझे

जिसको भरने में लगी थी एक उम्र
ज़ख़्म वैसा और दे लाकर मुझे

हमसे शिकवा रोज़ करती है हयात
खो दिया क्यूँ आपने पाकर मुझे

मैं ही क्यूँ समझा करूँ तुझ को सदा
ज़िन्दगी, तू भी तो समझा कर मुझे
Firoze

Firoze | We The Sukhanwar