राजनीति के मुद्दों में ख़ुद को उलझाना छोड़ दियासही-गलत की माथापच्ची को सुलझाना छोड़ दियाहृदय महकता फूल गुलाबी अधर गुलाबों जैसे हैंजबसे जीवन में तुम आई उपवन जाना छोड़ दियाMahendra 'Mohit'