Ejaz Rahbar

ये बात क्या है कि अब तलक भी यकीं मेरे इश्क का नहीं है
अभी मुहब्बत का उसके दिल में चराग शायद जला नहीं है

जहाँ में ऐसा भी कोई है इस वबा में जो मुब्तिला नहीं है
ये इश्क़ ही है वो मर्ज़ जिसकी ज़माने-भर में दवा नहीं है

जुदाई लाज़िम अगर है अपनी तो जाते-जाते ये सुनते जाओ
बिछड़के तुमसे न जी सकूँगा ये तुमको शायद पता नहीं है

उदास दिल को मेरे यकीं है कि तुम यहीं हां यहीं कहीं हो
अगरचे मीलों कि है मसाफत मगर कोई फ़ासला नहीं है

बिछड़ना जिसमें हो लाज़मी फिर वही तो कामिल है इश्क़ ठहरा
अगर हो पाना ही इतना आसाँ तो दिल्लगी का मज़ा नहीं है

ज़माना मुझसे ये कह रहा है कि हार जाओगे गर लड़ोगे
जो होगा रहबर सो देख लेंगे वो आदमी है ख़ुदा नहीं है
Ejaz Rahbar

Ejaz Rahbar | We The Sukhanwar