ये बात क्या है कि अब तलक भी यकीं मेरे इश्क का नहीं है
अभी मुहब्बत का उसके दिल में चराग शायद जला नहीं है
जहाँ में ऐसा भी कोई है इस वबा में जो मुब्तिला नहीं है
ये इश्क़ ही है वो मर्ज़ जिसकी ज़माने-भर में दवा नहीं है
जुदाई लाज़िम अगर है अपनी तो जाते-जाते ये सुनते जाओ
बिछड़के तुमसे न जी सकूँगा ये तुमको शायद पता नहीं है
उदास दिल को मेरे यकीं है कि तुम यहीं हां यहीं कहीं हो
अगरचे मीलों कि है मसाफत मगर कोई फ़ासला नहीं है
बिछड़ना जिसमें हो लाज़मी फिर वही तो कामिल है इश्क़ ठहरा
अगर हो पाना ही इतना आसाँ तो दिल्लगी का मज़ा नहीं है
ज़माना मुझसे ये कह रहा है कि हार जाओगे गर लड़ोगे
जो होगा रहबर सो देख लेंगे वो आदमी है ख़ुदा नहीं है
Ejaz Rahbar